श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सोऽहं तवानुग्रहार्थं गुहामेतामुपागतः।

प्रार्थितः प्रचुरं पूर्वं त्वयाहं भक्तवत्सलः॥ ४३

so'haṃ tavānugrahārthaṃ guhāmetāmupāgataḥ|

prārthitaḥ pracuraṃ pūrvaṃ tvayāhaṃ bhaktavatsalaḥ|| 43

अर्थ

वही मैं तुमपर कृपा करनेके लिये ही इस गुफामें आया हूँ। तुमने पहले मेरी बहुत आराधना की है और मैं हूँ भक्तवत्सल॥ ४३॥

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