श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

एवं क्षिप्तोऽपि भगवान् प्राविशद् गिरिकन्दरम्।

सोऽपि प्रविष्टस्तत्रान्यं शयानं ददृशे नरम्॥ ९

evaṃ kṣipto'pi bhagavān prāviśad girikandaram|

so'pi praviṣṭastatrānyaṃ śayānaṃ dadṛśe naram|| 9

अर्थ

उसके आक्षेप करते रहनेपर भी भगवान् उस पर्वतकी गुफामें घुस गये। उनके पीछे कालयवन भी घुसा। वहाँ उसने एक दूसरे ही मनुष्यको सोते हुए देखा॥ ९॥

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