॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.51.8
पलायनं यदुकुले जातस्य तव नोचितम्।
इति क्षिपन्ननुगतो नैनं प्रापाहताशुभः॥ ८
palāyanaṃ yadukule jātasya tava nocitam|
iti kṣipannanugato nainaṃ prāpāhatāśubhaḥ|| 8
अर्थ
कालयवन पीछेसे बार-बार आक्षेप करता कि ‘अरे भाई! तुम परम यशस्वी यदुवंशमें पैदा हुए हो, तुम्हारा इस प्रकार युद्ध छोड़कर भागना उचित नहीं है।’ परन्तु अभी उसके अशुभ निःशेष नहीं हुए थे, इसलिये वह भगवान्को पानेमें समर्थ न हो सका॥ ८॥