जब परमसुन्दरी रुक्मिणीको यह मालूम हुआ कि मेरा बड़ा भाई रुक्मी शिशुपालके साथ मेरा विवाह करना चाहता है, तब वे बहुत उदास हो गयीं। उन्होंने बहुत कुछ सोच-विचारकर एक विश्वासपात्र ब्राह्मणको तुरंत श्रीकृष्णके पास भेजा॥ २६॥✎ 1686
तदवेत्यासितापांगी वैदर्भी दुर्मना भृशम्।
विचिन्त्याप्तं द्विजं कंचित् कृष्णाय प्राहिणोद् द्रुतम्॥ २६
जब परमसुन्दरी रुक्मिणीको यह मालूम हुआ कि मेरा बड़ा भाई रुक्मी शिशुपालके साथ मेरा विवाह करना चाहता है, तब वे बहुत उदास हो गयीं। उन्होंने बहुत कुछ सोच-विचारकर एक विश्वासपात्र ब्राह्मणको तुरंत श्रीकृष्णके पास भेजा॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 463) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/52/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)