राजा भीष्मक कुलपरम्परा और शास्त्रीय विधियोंके बड़े जानकार थे। उन्होंने सोना, चाँदी, वस्त्र, गुड़ मिले हुए तिल और गौएँ ब्राह्मणोंको दीं॥ १३॥✎ 1934
हिरण्यरूप्यवासांसि तिलांश्च गुडमिश्रितान्।
प्रादाद् धेनूश्च विप्रेभ्यो राजा विधिविदां वरः॥ १३
राजा भीष्मक कुलपरम्परा और शास्त्रीय विधियोंके बड़े जानकार थे। उन्होंने सोना, चाँदी, वस्त्र, गुड़ मिले हुए तिल और गौएँ ब्राह्मणोंको दीं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.53.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 468) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/53/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1934 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): पुष्प-माला → पुष्पमाला