श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

हिरण्यरूप्यवासांसि तिलांश्‍च गुडमिश्रितान्।

प्रादाद् धेनूश्‍च विप्रेभ्यो राजा विधिविदां वरः॥ १३

hiraṇyarūpyavāsāṃsi tilāṃśca guḍamiśritān|

prādād dhenūśca viprebhyo rājā vidhividāṃ varaḥ|| 13

अर्थ

राजा भीष्मक कुलपरम्परा और शास्त्रीय विधियोंके बड़े जानकार थे। उन्होंने सोना, चाँदी, वस्त्र, गुड़ मिले हुए तिल और गौएँ ब्राह्मणोंको दीं॥ १३॥✎ 1934

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1934 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): पुष्प-माला → पुष्पमाला

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