श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तस्यै स्त्रियस्ताः प्रददुः शेषां युयुजुराशिषः।

ताभ्यो देव्यै नमश्‍चक्रे शेषां च जगृहे वधूः॥ ४९

tasyai striyastāḥ pradaduḥ śeṣāṃ yuyujurāśiṣaḥ|

tābhyo devyai namaścakre śeṣāṃ ca jagṛhe vadhūḥ|| 49

अर्थ

तब ब्राह्मणियोंने उन्हें प्रसाद देकर आशीर्वाद दिये और दुलहिनने ब्राह्मणियों और माता अम्बिकाको नमस्कार करके प्रसाद ग्रहण किया॥ ४९॥

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