॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.53.5
स चाश्वैः शैव्यसुग्रीवमेघपुष्पबलाहकैः।
युक्तं रथमुपानीय तस्थौ प्रांजलिरग्रतः॥ ५
sa cāśvaiḥ śaivyasugrīvameghapuṣpabalāhakaiḥ|
yuktaṃ rathamupānīya tasthau prāṃjaliragrataḥ|| 5
अर्थ
दारुक भगवान्के रथमें शैव्य, सुग्रीव, मेघपुष्प और बलाहक नामके चार घोड़े जोतकर उसे ले आया और हाथ जोड़कर भगवान्के सामने खड़ा हो गया॥ ५॥