॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.53.9
स्रग्गन्धमाल्याभरणैर्विरजोऽम्बरभूषितैः ।
जुष्टं स्त्रीपुरुषैः श्रीमद्गृहैरगुरुधूपितैः॥ ९
sraggandhamālyābharaṇairvirajo'mbarabhūṣitaiḥ |
juṣṭaṃ strīpuruṣaiḥ śrīmadgṛhairagurudhūpitaiḥ|| 9
अर्थ
वहाँके स्त्री-पुरुष पुष्पमाला, हार, इत्र-फुलेल, चन्दन, गहने और निर्मल वस्त्रोंसे सजे हुए थे। वहाँके सुन्दर-सुन्दर घरोंमेंसे अगरके धूपकी सुगन्ध फैल रही थी॥ ९॥✎ 1934