sa cānyad dhanurādāya kṛṣṇaṃ vivyādha pañcabhiḥ|| 27
अर्थ
साथ ही भगवान् श्रीकृष्णने आठ बाण उसके चार घोड़ोंपर और दो सारथिपर छोड़े और तीन बाणोंसे उसके रथकी ध्वजाको काट डाला। तब रुक्मीने दूसरा धनुष उठाया और भगवान् श्रीकृष्णको पाँच बाण मारे॥ २७॥
अष्टभिश्चतुरो वाहान् द्वाभ्यां सूतं ध्वजं त्रिभिः।
स चान्यद् धनुरादाय कृष्णं विव्याध पञ्चभिः॥ २७
साथ ही भगवान् श्रीकृष्णने आठ बाण उसके चार घोड़ोंपर और दो सारथिपर छोड़े और तीन बाणोंसे उसके रथकी ध्वजाको काट डाला। तब रुक्मीने दूसरा धनुष उठाया और भगवान् श्रीकृष्णको पाँच बाण मारे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 476) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/54/27/