श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तैस्ताडितः शरौघैस्तु चिच्छेद धनुरच्युतः।

पुनरन्यदुपादत्त तदप्यच्छिनदव्ययः॥ २८

taistāḍitaḥ śaraughaistu ciccheda dhanuracyutaḥ|

punaranyadupādatta tadapyacchinadavyayaḥ|| 28

अर्थ

उन बाणोंके लगनेपर उन्होंने उसका वह धनुष भी काट डाला। रुक्मीने इसके बाद एक और धनुष लिया, परन्तु हाथमें लेते-ही-लेते अविनाशी अच्युतने उसे भी काट डाला॥ २८॥

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