श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

प्रहस्य भगवानाह मा स्म भैर्वामलोचने।

विनंक्ष्यत्यधुनैवैतत् तावकैः शात्रवं बलम्॥ ५

prahasya bhagavānāha mā sma bhairvāmalocane|

vinaṃkṣyatyadhunaivaitat tāvakaiḥ śātravaṃ balam|| 5

अर्थ

भगवान्‌ने हँसकर कहा—‘सुन्दरी! डरो मत। तुम्हारी सेना अभी तुम्हारे शत्रुओंकी सेनाको नष्ट किये डालती है’॥ ५॥✎ 1688 2111

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1688 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: रण-भूमिमें → रणभूमिमें
  • #2111 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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