श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तेषां तद्विक्रमं वीरा गदसंकर्षणादयः।

अमृष्यमाणा नाराचैर्जघ्नुर्हयगजान् रथान्॥ ६

teṣāṃ tadvikramaṃ vīrā gadasaṃkarṣaṇādayaḥ|

amṛṣyamāṇā nārācairjaghnurhayagajān rathān|| 6

अर्थ

इधर गद और संकर्षण आदि यदुवंशी वीर अपने शत्रुओंका पराक्रम और अधिक न सह सके। वे अपने बाणोंसे शत्रुओंके हाथी, घोड़े तथा रथोंको छिन्‍न-भिन्‍न करने लगे॥ ६॥✎ 1688 2111

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1688 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: रण-भूमिमें → रणभूमिमें
  • #2111 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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