इधर गद और संकर्षण आदि यदुवंशी वीर अपने शत्रुओंका पराक्रम और अधिक न सह सके। वे अपने बाणोंसे शत्रुओंके हाथी, घोड़े तथा रथोंको छिन्न-भिन्न करने लगे॥ ६॥✎ 16882111
तेषां तद्विक्रमं वीरा गदसंकर्षणादयः।
अमृष्यमाणा नाराचैर्जघ्नुर्हयगजान् रथान्॥ ६
इधर गद और संकर्षण आदि यदुवंशी वीर अपने शत्रुओंका पराक्रम और अधिक न सह सके। वे अपने बाणोंसे शत्रुओंके हाथी, घोड़े तथा रथोंको छिन्न-भिन्न करने लगे॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 474) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/54/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)