श्रीकृष्णनन्दन भगवान् प्रद्युम्नने उसके भावोंमें परिवर्तन देखकर कहा—‘देवि! तुम तो मेरी माँके समान हो। तुम्हारी बुद्धि उलटी कैसे हो गयी? मैं देखता हूँ कि तुम माताका भाव छोड़कर कामिनीके समान हाव-भाव दिखा रही हो’॥ ११॥
तामाह भगवान् कार्ष्णिर्मातस्ते मतिरन्यथा।
मातृभावमतिक्रम्य वर्तसे कामिनी यथा॥ ११
श्रीकृष्णनन्दन भगवान् प्रद्युम्नने उसके भावोंमें परिवर्तन देखकर कहा—‘देवि! तुम तो मेरी माँके समान हो। तुम्हारी बुद्धि उलटी कैसे हो गयी? मैं देखता हूँ कि तुम माताका भाव छोड़कर कामिनीके समान हाव-भाव दिखा रही हो’॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 482) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/11/