श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सोऽधिक्षिप्तो दुर्वचोभिः पदाहत इवोरगः।

निश्‍चक्राम गदापाणिरमर्षात्ताम्रलोचनः॥ १८

so'dhikṣipto durvacobhiḥ padāhata ivoragaḥ|

niścakrāma gadāpāṇiramarṣāttāmralocanaḥ|| 18

अर्थ

प्रद्युम्‍नजीके कटुवचनोंकी चोटसे शम्बरासुर तिलमिला उठा। मानो किसीने विषैले साँपको पैरसे ठोकर मार दी हो। उसकी आँखें क्रोधसे लाल हो गयीं। वह हाथमें गदा लेकर बाहर निकल आया॥ १८॥

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