महारथी प्रद्युम्नजीपर बहुत-सी अस्त्र-वर्षा करके जब वह उन्हें पीड़ित करने लगा तब उन्होंने समस्त मायाओंको शान्त करनेवाली सत्त्वमयी महाविद्याका प्रयोग किया॥ २२॥✎ 2113
बाध्यमानोऽस्त्रवर्षेण रौक्मिणेयो महारथः।
सत्त्वात्मिकां महाविद्यां सर्वमायोपमर्दिनीम्॥ २२
महारथी प्रद्युम्नजीपर बहुत-सी अस्त्र-वर्षा करके जब वह उन्हें पीड़ित करने लगा तब उन्होंने समस्त मायाओंको शान्त करनेवाली सत्त्वमयी महाविद्याका प्रयोग किया॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 483) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)