तब वह दैत्य मयासुरकी बतलायी हुई आसुरी मायाका आश्रय लेकर आकाशमें चला गया और वहींसे प्रद्युम्नजीपर अस्त्र-शस्त्रोंकी वर्षा करने लगा॥ २१॥✎ 2113
स च मायां समाश्रित्य दैतेयीं मयदर्शिताम्।
मुमुचेऽस्त्रमयं वर्षं कार्ष्णौ वैहायसोऽसुरः॥ २१
तब वह दैत्य मयासुरकी बतलायी हुई आसुरी मायाका आश्रय लेकर आकाशमें चला गया और वहींसे प्रद्युम्नजीपर अस्त्र-शस्त्रोंकी वर्षा करने लगा॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 483) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/55/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)