परीक्षित्! आकाशमें अपनी गोरी पत्नीके साथ साँवले प्रद्युम्नजीकी ऐसी शोभा हो रही थी, मानो बिजली और मेघका जोड़ा हो। इस प्रकार उन्होंने भगवान्के उस उत्तम अन्तःपुरमें प्रवेश किया जिसमें सैकड़ों श्रेष्ठ रमणियाँ निवास करती थीं॥ २६॥✎ 1690
अन्तःपुरवरं राजन् ललनाशतसंकुलम्।
विवेश पत्न्या गगनाद् विद्युतेव बलाहकः॥ २६
परीक्षित्! आकाशमें अपनी गोरी पत्नीके साथ साँवले प्रद्युम्नजीकी ऐसी शोभा हो रही थी, मानो बिजली और मेघका जोड़ा हो। इस प्रकार उन्होंने भगवान्के उस उत्तम अन्तःपुरमें प्रवेश किया जिसमें सैकड़ों श्रेष्ठ रमणियाँ निवास करती थीं॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 484) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)