मेरा भी एक नन्हा-सा शिशु खो गया था। न जाने कौन उसे सूतिकागृहसे उठा ले गया! यदि वह कहीं जीता-जागता होगा तो उसकी अवस्था तथा रूप भी इसीके समान हुआ होगा॥ ३२॥
मम चाप्यात्मजो नष्टो नीतो यः सूतिकागृहात्।
एतत्तुल्यवयोरूपो यदि जीवति कुत्रचित्॥ ३२
मेरा भी एक नन्हा-सा शिशु खो गया था। न जाने कौन उसे सूतिकागृहसे उठा ले गया! यदि वह कहीं जीता-जागता होगा तो उसकी अवस्था तथा रूप भी इसीके समान हुआ होगा॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 484) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/55/32/