श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

मम चाप्यात्मजो नष्टो नीतो यः सूतिकागृहात्।

एतत्तुल्यवयोरूपो यदि जीवति कुत्रचित्॥ ३२

mama cāpyātmajo naṣṭo nīto yaḥ sūtikāgṛhāt|

etattulyavayorūpo yadi jīvati kutracit|| 32

अर्थ

मेरा भी एक नन्हा-सा शिशु खो गया था। न जाने कौन उसे सूतिकागृहसे उठा ले गया! यदि वह कहीं जीता-जागता होगा तो उसकी अवस्था तथा रूप भी इसीके समान हुआ होगा॥ ३२॥

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