स्यमन्तकमणिकी कथा, जाम्बवती और सत्यभामाके साथ श्रीकृष्णका विवाह
श्रीशुक उवाच
सत्राजितः स्वतनयां कृष्णाय कृतकिल्बिषः।
स्यमन्तकेन मणिना स्वयमुद्यम्य दत्तवान्॥ १
satrājitaḥ svatanayāṃ kṛṣṇāya kṛtakilbiṣaḥ|
syamantakena maṇinā svayamudyamya dattavān|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! सत्राजित्ने श्रीकृष्णको झूठा कलंक लगाया था। फिर उस अपराधका मार्जन करनेके लिये उसने स्वयं स्यमन्तकमणि सहित अपनी कन्या सत्यभामा भगवान् श्रीकृष्णको सौंप दी॥ १॥
सत्राजितः स्वतनयां कृष्णाय कृतकिल्बिषः।
स्यमन्तकेन मणिना स्वयमुद्यम्य दत्तवान्॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! सत्राजित्ने श्रीकृष्णको झूठा कलंक लगाया था। फिर उस अपराधका मार्जन करनेके लिये उसने स्वयं स्यमन्तकमणि सहित अपनी कन्या सत्यभामा भगवान् श्रीकृष्णको सौंप दी॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 486) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/56/1/