वहाँ एक सिंहने घोड़े सहित प्रसेनको मार डाला और उस मणिको छीन लिया। वह अभी पर्वतकी गुफामें प्रवेश कर ही रहा था कि मणिके लिये ऋक्षराज जाम्बवान्ने उसे मार डाला॥ १४॥
प्रसेनं सहयं हत्वा मणिमाच्छिद्य केसरी।
गिरिं विशञ्जाम्बवता निहतो मणिमिच्छता॥ १४
वहाँ एक सिंहने घोड़े सहित प्रसेनको मार डाला और उस मणिको छीन लिया। वह अभी पर्वतकी गुफामें प्रवेश कर ही रहा था कि मणिके लिये ऋक्षराज जाम्बवान्ने उसे मार डाला॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 487) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/56/14/