‘ऋक्षराज! हम मणिके लिये ही तुम्हारी इस गुफामें आये हैं। इस मणिके द्वारा मैं अपनेपर लगे झूठे कलंकको मिटाना चाहता हूँ’॥ ३१॥✎ 2114
मणिहेतोरिह प्राप्ता वयमृक्षपते बिलम्।
मिथ्याभिशापं प्रमृजन्नात्मनो मणिनामुना॥ ३१
‘ऋक्षराज! हम मणिके लिये ही तुम्हारी इस गुफामें आये हैं। इस मणिके द्वारा मैं अपनेपर लगे झूठे कलंकको मिटाना चाहता हूँ’॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 489) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/56/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)