भगवान्के ऐसा कहनेपर जाम्बवान्ने बड़े आनन्दसे उनकी पूजा करनेके लिये अपनी कन्या कुमारी जाम्बवतीको मणिके साथ उनके चरणोंमें समर्पित कर दिया॥ ३२॥✎ 2114
इत्युक्तः स्वां दुहितरं कन्यां जाम्बवतीं मुदा।
अर्हणार्थं स मणिना कृष्णायोपजहार ह॥ ३२
भगवान्के ऐसा कहनेपर जाम्बवान्ने बड़े आनन्दसे उनकी पूजा करनेके लिये अपनी कन्या कुमारी जाम्बवतीको मणिके साथ उनके चरणोंमें समर्पित कर दिया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 489) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/56/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)