॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.56.44
तां सत्यभामां भगवानुपयेमे यथाविधि।
बहुभिर्याचितां शीलरूपौदार्यगुणान्विताम्॥ ४४
tāṃ satyabhāmāṃ bhagavānupayeme yathāvidhi|
bahubhiryācitāṃ śīlarūpaudāryaguṇānvitām|| 44
अर्थ
सत्यभामा शील-स्वभाव, सुन्दरता, उदारता आदि सद्गुणोंसे सम्पन्न थीं। बहुत-से लोग चाहते थे कि सत्यभामा हमें मिलें और उन लोगोंने उन्हें माँगा भी था। परन्तु अब भगवान् श्रीकृष्णने विधिपूर्वक उनका पाणिग्रहण किया॥ ४४॥