श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सोऽपि कृष्णोद्यमं ज्ञात्वा भीतः प्राणपरीप्सया।

साहाय्ये कृतवर्माणमयाचत स चाब्रवीत्॥ ११

so'pi kṛṣṇodyamaṃ jñātvā bhītaḥ prāṇaparīpsayā|

sāhāyye kṛtavarmāṇamayācata sa cābravīt|| 11

अर्थ

जब शतधन्वाको यह मालूम हुआ कि भगवान् श्रीकृष्ण मुझे मारनेका उद्योग कर रहे हैं, तब वह बहुत डर गया और अपने प्राण बचानेके लिये उसने कृतवर्मासे सहायता माँगी। तब कृतवर्माने कहा—॥ ११॥✎ 1692

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1692 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: स्यमन्तक-मणि → स्यमन्तकमणि

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