‘भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी सर्व-शक्तिमान् ईश्वर हैं। मैं उनका सामना नहीं कर सकता। भला, ऐसा कौन है, जो उनके साथ वैर बाँधकर इस लोक और परलोकमें सकुशल रह सके?॥ १२॥✎ 1692
नाहमीश्वरयोः कुर्यां हेलनं रामकृष्णयोः।
को नु क्षेमाय कल्पेत तयोर्वृजिनमाचरन्॥ १२
‘भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी सर्व-शक्तिमान् ईश्वर हैं। मैं उनका सामना नहीं कर सकता। भला, ऐसा कौन है, जो उनके साथ वैर बाँधकर इस लोक और परलोकमें सकुशल रह सके?॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.57.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 492) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/57/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)