श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

उवास तस्यां कतिचिन्मिथिलायां समा विभुः।

मानितः प्रीतियुक्तेन जनकेन महात्मना।

ततोऽशिक्षद् गदां काले धार्तराष्ट्रः सुयोधनः॥ २६

uvāsa tasyāṃ katicinmithilāyāṃ samā vibhuḥ|

mānitaḥ prītiyuktena janakena mahātmanā|

tato'śikṣad gadāṃ kāle dhārtarāṣṭraḥ suyodhanaḥ|| 26

अर्थ

इसके बाद भगवान् बलरामजी कई वर्षोंतक मिथिलापुरीमें ही रहे। महात्मा जनकने बड़े प्रेम और सम्मानसे उन्हें रखा। इसके बाद समयपर धृतराष्ट्रके पुत्र दुर्योधनने बलरामजीसे गदायुद्धकी शिक्षा ग्रहण की॥ २६॥

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