इसके बाद भगवान् बलरामजी कई वर्षोंतक मिथिलापुरीमें ही रहे। महात्मा जनकने बड़े प्रेम और सम्मानसे उन्हें रखा। इसके बाद समयपर धृतराष्ट्रके पुत्र दुर्योधनने बलरामजीसे गदायुद्धकी शिक्षा ग्रहण की॥ २६॥
उवास तस्यां कतिचिन्मिथिलायां समा विभुः।
मानितः प्रीतियुक्तेन जनकेन महात्मना।
ततोऽशिक्षद् गदां काले धार्तराष्ट्रः सुयोधनः॥ २६
इसके बाद भगवान् बलरामजी कई वर्षोंतक मिथिलापुरीमें ही रहे। महात्मा जनकने बड़े प्रेम और सम्मानसे उन्हें रखा। इसके बाद समयपर धृतराष्ट्रके पुत्र दुर्योधनने बलरामजीसे गदायुद्धकी शिक्षा ग्रहण की॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.57.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 494) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/57/26/