अप्राप्तिं च मणेः प्राह प्रियायाः प्रियकृद् विभुः॥ २७
keśavo dvārakāmetya nidhanaṃ śatadhanvanaḥ|
aprāptiṃ ca maṇeḥ prāha priyāyāḥ priyakṛd vibhuḥ|| 27
अर्थ
अपनी प्रिया सत्यभामाका प्रिय कार्य करके भगवान् श्रीकृष्ण द्वारका लौट आये और उनको यह समाचार सुना दिया कि शतधन्वाको मार डाला गया, परन्तु स्यमन्तकमणि उसके पास न मिली॥ २७॥
केशवो द्वारकामेत्य निधनं शतधन्वनः।
अप्राप्तिं च मणेः प्राह प्रियायाः प्रियकृद् विभुः॥ २७
अपनी प्रिया सत्यभामाका प्रिय कार्य करके भगवान् श्रीकृष्ण द्वारका लौट आये और उनको यह समाचार सुना दिया कि शतधन्वाको मार डाला गया, परन्तु स्यमन्तकमणि उसके पास न मिली॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.57.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 494) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/57/27/