श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

ततः स कारयामास क्रिया बन्धोर्हतस्य वै।

साकं सुहृद्भिर्भगवान् या याः स्युः साम्परायिकाः॥ २८

tataḥ sa kārayāmāsa kriyā bandhorhatasya vai|

sākaṃ suhṛdbhirbhagavān yā yāḥ syuḥ sāmparāyikāḥ|| 28

अर्थ

इसके बाद उन्होंने भाई-बन्धुओंके साथ अपने श्‍वशुर सत्राजित्की वे सब और्ध्वदैहिक क्रियाएँ करवायीं, जिनसे मृतक प्राणीका परलोक सुधरता है॥ २८॥

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