श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

एवं भिन्‍नमतिस्ताभ्यां सत्राजितमसत्तमः।

शयानमवधील्लोभात् स पापः क्षीणजीवितः॥ ५

evaṃ bhinnamatistābhyāṃ satrājitamasattamaḥ|

śayānamavadhīllobhāt sa pāpaḥ kṣīṇajīvitaḥ|| 5

अर्थ

शतधन्वा पापी था और अब तो उसकी मृत्यु भी उसके सिरपर नाच रही थी। अक्रूर और कृतवर्माके इस प्रकार बहकानेपर शतधन्वा उनकी बातोंमें आ गया और उस महादुष्टने लोभवश सोये हुए सत्राजित्को मार डाला॥ ५॥

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