कुछ दिनोंके बाद भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुनकी अनुमति एवं अन्य सम्बन्धियोंका अनुमोदन प्राप्त करके सात्यकि आदिके साथ द्वारका लौट आये॥ २८॥ वहाँ आकर उन्होंने विवाहके योग्य ऋतु और ज्यौतिष-शास्त्रके अनुसार प्रशंसित पवित्र लग्नमें कालिन्दीजीका पाणिग्रहण किया। इससे उनके स्वजन-सम्बन्धियोंको परम मंगल और परमानन्दकी प्राप्ति हुई॥ २९॥
यह व्याख्या श्लोक 10.58.28 से 10.58.29 तककी एक साथ है।
स तेन समनुज्ञातः सुहृद्भिश्चानुमोदितः।
आययौ द्वारकां भूयः सात्यकिप्रमुखैर्वृतः॥ २८
कुछ दिनोंके बाद भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुनकी अनुमति एवं अन्य सम्बन्धियोंका अनुमोदन प्राप्त करके सात्यकि आदिके साथ द्वारका लौट आये॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 499) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/58/28/