श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

गिरिदुर्गैः शस्त्रदुर्गैर्जला‌ग्‍न्यनिलदुर्गमम्।

मुरपाशायुतैर्घोरैर्दृढैः सर्वत आवृतम्॥ ३

giridurgaiḥ śastradurgairjalāgnyaniladurgamam|

murapāśāyutairghorairdṛḍhaiḥ sarvata āvṛtam|| 3

अर्थ

प्राग्ज्योतिषपुरमें प्रवेश करना बहुत कठिन था। पहले तो उसके चारों ओर पहाड़ोंकी किलेबंदी थी, उसके बाद शस्त्रोंका घेरा लगाया हुआ था। फिर जलसे भरी खाईं थी, उसके बाद आग या बिजलीकी चहारदीवारी थी और उसके भीतर वायु (गैस) बंद करके रखा गया था। इससे भी भीतर मुर दैत्यने नगरके चारों ओर अपने दस हजार घोर एवं सुदृढ फंदे (जाल) बिछा रखे थे॥ ३॥

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