श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

गदया निर्बिभेदाद्रीन् शस्त्रदुर्गाणि सायकैः।

चक्रेणाग्‍निं जलं वायुं मुरपाशांस्तथासिना॥ ४

gadayā nirbibhedādrīn śastradurgāṇi sāyakaiḥ|

cakreṇāgniṃ jalaṃ vāyuṃ murapāśāṃstathāsinā|| 4

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने अपनी गदाकी चोटसे पहाड़ोंको तोड़-फोड़ डाला और शस्त्रोंकी मोरचे-बंदीको बाणोंसे छिन्‍न-भिन्‍न कर दिया। चक्रके द्वारा अग्‍नि, जल और वायुकी चहारदीवारियोंको तहस-नहस कर दिया और मुर दैत्यके फंदोंको तलवारसे काट-कूटकर अलग रख दिया॥ ४॥

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