जो बड़े-बड़े यन्त्र—मशीनें वहाँ लगी हुई थीं, उनको तथा वीरपुरुषोंके हृदयको शंखनादसे विदीर्ण कर दिया और नगरके परकोटेको गदाधर भगवान्ने अपनी भारी गदासे ध्वंस कर डाला॥ ५॥
शंखनादेन यन्त्राणि हृदयानि मनस्विनाम्।
प्राकारं गदया गुर्व्या निर्बिभेद गदाधरः॥ ५
जो बड़े-बड़े यन्त्र—मशीनें वहाँ लगी हुई थीं, उनको तथा वीरपुरुषोंके हृदयको शंखनादसे विदीर्ण कर दिया और नगरके परकोटेको गदाधर भगवान्ने अपनी भारी गदासे ध्वंस कर डाला॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.59.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 504) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/59/5/