pūrvaṃ tu tanniḥsvanitabhinnahṛtkarṇamastakāḥ|| 17
अर्थ
पूतनाके उस शरीरको देखकर सब-के-सब ग्वाल और गोपी डर गये। उसकी भयंकर चिल्लाहट सुनकर उनके हृदय, कान और सिर तो पहले ही फट-से रहे थे॥ १७॥
सन्तत्रसुः स्म तद् वीक्ष्य गोपा गोप्यः कलेवरम्।
पूर्वं तु तन्निःस्वनितभिन्नहृत्कर्णमस्तकाः॥ १७
पूतनाके उस शरीरको देखकर सब-के-सब ग्वाल और गोपी डर गये। उसकी भयंकर चिल्लाहट सुनकर उनके हृदय, कान और सिर तो पहले ही फट-से रहे थे॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 158) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/17/