उन्होंने पहले बालक श्रीकृष्णको गोमूत्रसे स्नान कराया, फिर सब अंगोंमें गो-रज लगायी और फिर बारहों अंगोंमें गोबर लगाकर भगवान्के केशव आदि नामोंसे रक्षा की॥ २०॥
गोमूत्रेण स्नापयित्वा पुनर्गोरजसार्भकम्।
रक्षां चक्रुश्च शकृता द्वादशांगेषु नामभिः॥ २०
उन्होंने पहले बालक श्रीकृष्णको गोमूत्रसे स्नान कराया, फिर सब अंगोंमें गो-रज लगायी और फिर बारहों अंगोंमें गोबर लगाकर भगवान्के केशव आदि नामोंसे रक्षा की॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 159) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/6/20/