श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पद‍्भ्यां भक्तहृदिस्थाभ्यां वन्द्याभ्यां लोकवन्दितैः।

अंगं यस्याः समाक्रम्य भगवानपिबत् स्तनम्॥ ३७

padbhyāṃ bhaktahṛdisthābhyāṃ vandyābhyāṃ lokavanditaiḥ|

aṃgaṃ yasyāḥ samākramya bhagavānapibat stanam|| 37

अर्थ

भगवान्‌के चरणकमल सबके वन्दनीय ब्रह्मा, शंकर आदि देवताओंके द्वारा भी वन्दित हैं। वे भक्तोंके हृदयकी पूँजी हैं। उन्हीं चरणोंसे भगवान्‌ने पूतनाका शरीर दबाकर उसका स्तनपान किया था॥ ३७॥

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