श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.60.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 60 · अथ षष्टितमोऽध्यायः

वैदर्भ्येतदविज्ञाय त्वयादीर्घसमीक्षया।

वृता वयं गुणैर्हीना भिक्षुभिः श्‍लाघिता मुधा॥ १६

vaidarbhyetadavijñāya tvayādīrghasamīkṣayā|

vṛtā vayaṃ guṇairhīnā bhikṣubhiḥ ślāghitā mudhā|| 16

अर्थ

विदर्भराजकुमारी! तुमने अपनी अदूरदर्शिताके कारण इन बातोंका विचार नहीं किया और बिना जाने-बूझे भिक्षुकोंसे मेरी झूठी प्रशंसा सुनकर मुझ गुणहीनको वरण कर लिया॥ १६॥✎ 1438

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1438 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विदर्भ-राजकुमारी! → विदर्भराजकुमारी!

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