भगवान्की सन्ततिका वर्णन तथा अनिरुद्धके विवाहमें रुक्मीका मारा जाना
श्रीशुक उवाच
एकैकशस्ताः कृष्णस्य पुत्रान् दश दशाबलाः।
अजीजनन्ननवमान्पितुः सर्वात्मसम्पदा॥ १
ekaikaśastāḥ kṛṣṇasya putrān daśa daśābalāḥ|
ajījanannanavamānpituḥ sarvātmasampadā|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णकी प्रत्येक पत्नीके गर्भसे दस-दस पुत्र उत्पन्न हुए। वे रूप, बल आदि गुणोंमें अपने पिता भगवान् श्रीकृष्णसे किसी बातमें कम न थे॥ १॥
एकैकशस्ताः कृष्णस्य पुत्रान् दश दशाबलाः।
अजीजनन्ननवमान्पितुः सर्वात्मसम्पदा॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णकी प्रत्येक पत्नीके गर्भसे दस-दस पुत्र उत्पन्न हुए। वे रूप, बल आदि गुणोंमें अपने पिता भगवान् श्रीकृष्णसे किसी बातमें कम न थे॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.61.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 520) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/61/1/