श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

तं चापि जितवान् रामो धर्मेणच्छलमाश्रितः।

रुक्मी जितं मयात्रेमे वदन्तु प्राश्‍निका इति॥ ३२

taṃ cāpi jitavān rāmo dharmeṇacchalamāśritaḥ|

rukmī jitaṃ mayātreme vadantu prāśnikā iti|| 32

अर्थ

इस बार भी द्यूतनियमके अनुसार बलरामजीकी ही जीत हुई। परन्तु रुक्मीने छल करके कहा—‘मेरी जीत है। इस विषयके विशेषज्ञ कलिंगनरेश आदि सभासद् इसका निर्णय कर दें’॥ ३२॥

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