इस बार भी द्यूतनियमके अनुसार बलरामजीकी ही जीत हुई। परन्तु रुक्मीने छल करके कहा—‘मेरी जीत है। इस विषयके विशेषज्ञ कलिंगनरेश आदि सभासद् इसका निर्णय कर दें’॥ ३२॥
तं चापि जितवान् रामो धर्मेणच्छलमाश्रितः।
रुक्मी जितं मयात्रेमे वदन्तु प्राश्निका इति॥ ३२
इस बार भी द्यूतनियमके अनुसार बलरामजीकी ही जीत हुई। परन्तु रुक्मीने छल करके कहा—‘मेरी जीत है। इस विषयके विशेषज्ञ कलिंगनरेश आदि सभासद् इसका निर्णय कर दें’॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.61.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 524) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/61/32/