‘बलरामजी! आखिर आपलोग वन-वन भटकनेवाले ग्वाले ही तो ठहरे! आप पासा खेलना क्या जानें? पासों और बाणोंसे तो केवल राजालोग ही खेला करते हैं, आप-जैसे नहीं’॥ ३५॥✎ 1696
नैवाक्षकोविदा यूयं गोपाला वनगोचराः।
अक्षैर्दीव्यन्ति राजानो बाणैश्च न भवादृशाः॥ ३५
‘बलरामजी! आखिर आपलोग वन-वन भटकनेवाले ग्वाले ही तो ठहरे! आप पासा खेलना क्या जानें? पासों और बाणोंसे तो केवल राजालोग ही खेला करते हैं, आप-जैसे नहीं’॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.61.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 524) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/61/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)