श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

ऊषोवाच

दृष्टः कश्‍चिन्‍नरः स्वप्ने श्यामः कमललोचनः।

पीतवासा बृहद्बाहुर्योषितां हृदयंगमः॥ १६

dṛṣṭaḥ kaścinnaraḥ svapne śyāmaḥ kamalalocanaḥ|

pītavāsā bṛhadbāhuryoṣitāṃ hṛdayaṃgamaḥ|| 16

अर्थ

ऊषाने कहा—सखी! मैंने स्वप्नमें एक बहुत ही सुन्दर नवयुवकको देखा है। उसके शरीरका रंग साँवला-साँवला-सा है। नेत्र कमलदलके समान हैं। शरीरपर पीला-पीला पीताम्बर फहरा रहा है। भुजाएँ लम्बी-लम्बी हैं और वह स्त्रियोंका चित्त चुरानेवाला है॥ १६॥

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