सचमुच भगवान् शंकर बड़े ही भक्तवत्सल और शरणागतरक्षक हैं। समस्त भूतोंके एकमात्र स्वामी प्रभुने बाणासुरसे कहा—‘तुम्हारी जो इच्छा हो, मुझसे माँग लो।’ बाणासुरने कहा—‘भगवन्! आप मेरे नगरकी रक्षा करते हुए यहीं रहा करें’॥ ५॥
भगवान् सर्वभूतेशः शरण्यो भक्तवत्सलः।
वरेणच्छन्दयामास स तं वव्रे पुराधिपम्॥ ५
सचमुच भगवान् शंकर बड़े ही भक्तवत्सल और शरणागतरक्षक हैं। समस्त भूतोंके एकमात्र स्वामी प्रभुने बाणासुरसे कहा—‘तुम्हारी जो इच्छा हो, मुझसे माँग लो।’ बाणासुरने कहा—‘भगवन्! आप मेरे नगरकी रक्षा करते हुए यहीं रहा करें’॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.62.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 525) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/62/5/