इधर जब भगवान् शंकरके भूतगण इधर-उधर भाग गये, तब उनका छोड़ा हुआ तीन सिर और तीन पैरवाला ज्वर दसों दिशाओंको जलाता हुआ-सा भगवान् श्रीकृष्णकी ओर दौड़ा॥ २२॥✎ 2123
विद्राविते भूतगणे ज्वरस्तु त्रिशिरास्त्रिपात्।
अभ्यधावत दाशार्हं दहन्निव दिशो दश॥ २२
इधर जब भगवान् शंकरके भूतगण इधर-उधर भाग गये, तब उनका छोड़ा हुआ तीन सिर और तीन पैरवाला ज्वर दसों दिशाओंको जलाता हुआ-सा भगवान् श्रीकृष्णकी ओर दौड़ा॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 532) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/63/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)