त्रिशिरस्ते प्रसन्नोऽस्मि व्येतु ते मज्ज्वराद् भयम्।
यो नौ स्मरति संवादं तस्य त्वन्न भवेद् भयम्॥ २९
triśiraste prasanno'smi vyetu te majjvarād bhayam|
yo nau smarati saṃvādaṃ tasya tvanna bhaved bhayam|| 29
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘त्रिशिरा! मैं तुमपर प्रसन्न हूँ। अब तुम मेरे ज्वरसे निर्भय हो जाओ। संसारमें जो कोई हम दोनोंके संवादका स्मरण करेगा, उसे तुमसे कोई भय न रहेगा’॥ २९॥
त्रिशिरस्ते प्रसन्नोऽस्मि व्येतु ते मज्ज्वराद् भयम्।
यो नौ स्मरति संवादं तस्य त्वन्न भवेद् भयम्॥ २९
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘त्रिशिरा! मैं तुमपर प्रसन्न हूँ। अब तुम मेरे ज्वरसे निर्भय हो जाओ। संसारमें जो कोई हम दोनोंके संवादका स्मरण करेगा, उसे तुमसे कोई भय न रहेगा’॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 533) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/63/29/