भगवान् श्रीकृष्णके इस प्रकार कहनेपर माहेश्वर ज्वर उन्हें प्रणाम करके चला गया। तबतक बाणासुर रथपर सवार होकर भगवान् श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये फिर आ पहुँचा॥ ३०॥
इत्युक्तोऽच्युतमानम्य गतो माहेश्वरो ज्वरः।
बाणस्तु रथमारूढः प्रागाद्योत्स्यंजनार्दनम्॥ ३०
भगवान् श्रीकृष्णके इस प्रकार कहनेपर माहेश्वर ज्वर उन्हें प्रणाम करके चला गया। तबतक बाणासुर रथपर सवार होकर भगवान् श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये फिर आ पहुँचा॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 533) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/63/30/