परीक्षित्! बाणासुरने अपने हजार हाथोंमें तरह-तरहके हथियार ले रखे थे। अब वह अत्यन्त क्रोधमें भरकर चक्रपाणि भगवान्पर बाणोंकी वर्षा करने लगा॥ ३१॥
ततो बाहुसहस्रेण नानायुधधरोऽसुरः।
मुमोच परमक्रुद्धो बाणांश्चक्रायुधे नृप॥ ३१
परीक्षित्! बाणासुरने अपने हजार हाथोंमें तरह-तरहके हथियार ले रखे थे। अब वह अत्यन्त क्रोधमें भरकर चक्रपाणि भगवान्पर बाणोंकी वर्षा करने लगा॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 533) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/63/31/