श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.63.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 63 · अथ त्रिषष्टितमोऽध्यायः

ततो बाहुसहस्रेण नानायुधधरोऽसुरः।

मुमोच परमक्रुद्धो बाणांश्‍चक्रायुधे नृप॥ ३१

tato bāhusahasreṇa nānāyudhadharo'suraḥ|

mumoca paramakruddho bāṇāṃścakrāyudhe nṛpa|| 31

अर्थ

परीक्षित्! बाणासुरने अपने हजार हाथोंमें तरह-तरहके हथियार ले रखे थे। अब वह अत्यन्त क्रोधमें भरकर चक्रपाणि भगवान्‌पर बाणोंकी वर्षा करने लगा॥ ३१॥

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