श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.64.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 64 · अथ चतुःषष्टितमोऽध्यायः

नमस्ते सर्वभावाय ब्रह्मणेऽनन्तशक्तये।

कृष्णाय वासुदेवाय योगानां पतये नमः॥ २९

namaste sarvabhāvāya brahmaṇe'nantaśaktaye|

kṛṣṇāya vāsudevāya yogānāṃ pataye namaḥ|| 29

अर्थ

आप समस्त कार्यों और कारणोंके रूपमें विद्यमान हैं। आपकी शक्ति अनन्त है और आप स्वयं ब्रह्म हैं। आपको मैं नमस्कार करता हूँ। सच्चिदानन्दस्वरूप सर्वान्तर्यामी वासुदेव श्रीकृष्ण! आप समस्त योगोंके स्वामी, योगेश्‍वर हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ॥ २९॥

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