राजा नृगने इस प्रकार कहकर भगवान्की परिक्रमा की और अपने मुकुटसे उनके चरणोंका स्पर्श करके प्रणाम किया। फिर उनसे आज्ञा लेकर सबके देखते-देखते ही वे श्रेष्ठ विमानपर सवार हो गये॥ ३०॥
इत्युक्त्वा तं परिक्रम्य पादौ स्पृष्ट्वा स्वमौलिना।
अनुज्ञातो विमानाग्र्यमारुहत् पश्यतां नृणाम्॥ ३०
राजा नृगने इस प्रकार कहकर भगवान्की परिक्रमा की और अपने मुकुटसे उनके चरणोंका स्पर्श करके प्रणाम किया। फिर उनसे आज्ञा लेकर सबके देखते-देखते ही वे श्रेष्ठ विमानपर सवार हो गये॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.64.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 540) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/64/30/