उसका यह सारा-का-सारा वेष बनावटी था, मानो कोई अभिनेता रंगमंचपर अभिनय करनेके लिये आया हो। उसकी वेष-भूषा अपने समान देखकर भगवान् श्रीकृष्ण खिलखिलाकर हँसने लगे॥ १५॥✎ 1700
दृष्ट्वा तमात्मनस्तुल्यवेषं कृत्रिममास्थितम्।
यथा नटं रंगगतं विजहास भृशं हरिः॥ १५
उसका यह सारा-का-सारा वेष बनावटी था, मानो कोई अभिनेता रंगमंचपर अभिनय करनेके लिये आया हो। उसकी वेष-भूषा अपने समान देखकर भगवान् श्रीकृष्ण खिलखिलाकर हँसने लगे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 547) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/66/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)