॥ श्रीहरिः ॥
तथा काशिपतेः कायाच्छिर उत्कृत्य पत्रिभिः।
न्यपातयत् काशिपुर्यां पद्मकोशमिवानिलः॥ २२
tathā kāśipateḥ kāyācchira utkṛtya patribhiḥ|
nyapātayat kāśipuryāṃ padmakośamivānilaḥ|| 22
अर्थ
इसी प्रकार भगवान्ने अपने बाणोंसे काशिनरेशका सिर भी धड़से ऊपर उड़ाकर काशीपुरीमें गिरा दिया, जैसे वायु कमलका पुष्प गिरा देती है॥ २२॥
तथा काशिपतेः कायाच्छिर उत्कृत्य पत्रिभिः।
न्यपातयत् काशिपुर्यां पद्मकोशमिवानिलः॥ २२
इसी प्रकार भगवान्ने अपने बाणोंसे काशिनरेशका सिर भी धड़से ऊपर उड़ाकर काशीपुरीमें गिरा दिया, जैसे वायु कमलका पुष्प गिरा देती है॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 548) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/66/22/